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राजस्व कर्मियों पर गंभीर आरोप, पैमाइश के बाद भी सीमा विवाद बरकरार, मारपीट की आशंका

राजस्व कर्मियों पर गंभीर आरोप, पैमाइश के बाद भी सीमा विवाद बरकरार, मारपीट की आशंका

राजस्व कर्मियों पर गंभीर आरोप, पैमाइश के बाद भी सीमा विवाद बरकरार, मारपीट की आशंका

 

 

रामसनेहीघाट बाराबंकी। उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 24 के तहत हुए एक भूमि सीमांकन के मामले में नया मोड़ आ गया है। तहसील रामसनेही घाट के अंतर्गत ग्राम रतौली के एक पीड़ित ने लेखपाल और राजस्व निरीक्षक पर गंभीर आरोप लगाते हुए जिलाधिकारी से न्याय की गुहार लगाई है। पीड़ित का आरोप है कि राजस्व कर्मियों ने मिलीभगत कर तय सीमा को बदल दिया है, जिससे गांव में कभी भी शांति भंग हो सकती है।

*क्या है पूरा मामला* प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार, ग्राम रतौली (परगना-सूर्यपुर, तहसील-रामसनेही घाट) के गाटा संख्या 907 (क्षेत्रफल 0.900 हेक्टेयर) को लेकर ‘राजकुमार बनाम संतसरन आदि’ का एक वाद न्यायालय उपजिलाधिकारी (न्यायिक) रामसनेही घाट में चल रहा था। 20 अक्टूबर 2022 को उपजिलाधिकारी न्यायालय द्वारा इस सीमांकन की पुष्टि की गई थी।

इसके बाद 16 दिसंबर 2024 को पुलिस बल की मौजूदगी में राजस्व निरीक्षक और लेखपाल द्वारा मौके पर जाकर मेड़बंदी व पिलर गाड़ने की कार्रवाई की गई थी, जिसकी रिपोर्ट तहसील कार्यालय भेजी गई थी, पीड़ित राजकुमार के पुत्र सतीश कुमार यादव (निवासी: गौड़पुरवा मजरे रतौली) ने 24 जून 2026 को जिलाधिकारी बाराबंकी को एक शिकायती पत्र भेजा है। जो शिकायती पत्र में आरोप लगाया गया है कि ग्राम अशरफपुर और रातोली की सीमा पर एक रास्ता स्थित था।

पहली पैमाइश के दौरान राजस्व निरीक्षक ने उस रास्ते को अशरफपुर की सीमा में दिखाया था और पुलिस की मौजूदगी में गाटा संख्या 907 की मेड़बंदी कराकर खंभे लगवा दिए थे।

लेकिन बाद में, राजस्व निरीक्षक और लेखपाल ने विपक्षी पार्टी से कथित रूप से अवैध धन लेकर उस रास्ते को दोबारा अशरफपुर की सीमा में शामिल कर दिया और वादी पक्ष से जबरन खंभे आगे बढ़ाकर बांधने को कहा।

 

सतीश कुमार का कहना है कि यह रास्ता असल में अशरफपुर के नक्शे में दर्ज है, रतौली के नक्शे में नहीं। राजस्व कर्मियों की इस कथित मिलीभगत और हेरफेर के कारण दोनों पक्षों के बीच सीमा को लेकर भारी विवाद खड़ा हो गया है। पीड़ित ने आशंका जताई है कि इस विवाद के चलते गांव में कभी भी मारपीट व कोई अप्रिय घटना घटित हो सकती है। पीड़ित ने जिलाधिकारी से प्रार्थना की है कि मामले को संज्ञान में लेते हुए राजस्व निरीक्षक को उचित निर्देश दिए जाएं, ताकि रास्ते को उसके सही ग्राम के नक्शे के अनुसार सीमांकित किया जा सके और विवाद का स्थायी हल हो सके।

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